Posts by Kumar Parth

घरों में छुपे इंसान को ना देखकर ये परिंदे क्या सोचते होंगे?

मैं यह सोचता हूँ.. घरों में छुपे इंसान को ना देखकर ये परिंदे क्या सोचते होंगे? क्या सोचते होंगे ये

सुनो अब रात हो चुकी है, और इश्क़ की दुकान बंद हो चुकी है

सुनो अब रात हो चुकी है, और इश्क़ की दुकान बंद हो चुकी है। मुझे मालूम है कि तुम मेरी

कुमार पार्थ

“मेरी मृत्यु” (अध्याय-1)

मुझे पता है, आपलोग अनवरत मेरी जीवन-शैली में तनाव एवं बाधाएँ खड़ी करना चाहते हैं. मेरी अपनी तरह की शिक्षा,

KUMAR PARTH

मैं तो ऐसा ही हूँ.

मेरी कहानी कोई ज्यादा जटिल नहीं है. मैं बस थोड़ा थक सा गया था जबतक ये दुनिया मुझे समझ पा

क्योंकि अब इश्क़ की तलाश खत्म हो गयी। ..

बेहतर थी पहले की जिद कि हमें कुछ पाने के लिए किसी से पूछना जो पड़ता था. अब अपनी पसंद