मैं तो ऐसा ही हूँ.

मेरी कहानी कोई ज्यादा जटिल नहीं है. मैं बस थोड़ा थक सा गया था जबतक ये दुनिया मुझे समझ पा रही थी.  जब से मेरे पाँव नई दिशाओं को बढ़ चले हैं, नव-अंकुर फूट पड़ा है, तभी से मैं जटिल सा दिखने लगा हूँ. अब मुझको समझ पाने में आपको थोड़ी सी तकलीफ होगी। खैर… जो भी है, मैं तो ऐसा ही हूँ. अब मुझे परेशान नहीं किया जा सकता है. अब मेरे मन का परिवर्तन नहीं किया जा सकता है. अब दबाव डालना भी लगभग असंभव है.

लो भईया! आप तो चल दिए. लगता है कि आपको विश्वास होने लगा है कि मैं “कुमार पार्थ” नहीं हूँ. किसी और कुमार पार्थ की खोज में भी मत पड़ जाईयेगा, क्योंकि वह सिर्फ एक ही था.

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