घरों में छुपे इंसान को ना देखकर ये परिंदे क्या सोचते होंगे?

मैं यह सोचता हूँ.. घरों में छुपे इंसान को ना देखकर ये परिंदे क्या सोचते होंगे? क्या सोचते होंगे ये

सुनो अब रात हो चुकी है, और इश्क़ की दुकान बंद हो चुकी है

सुनो अब रात हो चुकी है, और इश्क़ की दुकान बंद हो चुकी है। मुझे मालूम है कि तुम मेरी

कुमार पार्थ

“मेरी मृत्यु” (अध्याय-1)

मुझे पता है, आपलोग अनवरत मेरी जीवन-शैली में तनाव एवं बाधाएँ खड़ी करना चाहते हैं. मेरी अपनी तरह की शिक्षा,